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prabhat pandey ज्ञान मृग मरीचिका जश्न चाह जितना वो जश्न कोई मना न सके creation सब उत्कृष्ट न हो हो न बन सकी दूजा हे आर्य वीरों! जागो दिल खुद जज्बात विरोध ध्यान सके

Hindi कोई बहला सके हमें न Poems